यह कहानी दिल्ली के एक व्यस्त चौराहे की है, जहाँ एक भयानक कार दुर्घटना (Force Collision) के पीछे छिपी थी साज़िश, अपराध और एक मासूम लड़की की बहादुरी।
रात के ११:४५ बजे — वो भयानक टक्करअँधेरी रात में मूसलाधार बारिश हो रही थी। २२ साल की अंजलि अपनी ऑफिस कैब का इंतज़ार कर रही थी, जब अचानक एक काले रंग की एसयूवी (SUV) उसके ठीक सामने आकर रुकी। गाड़ी का दरवाज़ा खुला और दो नकाबपोश आदमियों ने अंजलि को जबरन अंदर खींच लिया।

अंजलि चिल्लाई, उसने अपनी पूरी ताकत से संघर्ष किया, लेकिन गाड़ी की रफ्तार बढ़ चुकी थी। किडनैपर्स उसे शहर से बाहर ले जाने की फिराक में थे।
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि अंजलि कराटे में ब्लैक बेल्ट थी। गाड़ी के अंदर ही उसने हिम्मत दिखाई और गियर बदल रहे ड्राइवर के हाथ पर पूरी ताकत से वार किया। ड्राइवर का संतुलन बिगड़ा और ठीक उसी समय…
धमाका! सामने से आ रहे एक तेज़ रफ़्तार ट्रक और एसयूवी के बीच आमने-सामने की ज़बरदस्त टक्कर (Force Collision) हुई।

टक्कर इतनी भयानक थी कि एसयूवी का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। एयरबैग तो खुले, लेकिन झटके के प्रभाव (Impact Force) के कारण ड्राइवर और उसके बगल वाले अपराधी बेहोश हो गए। अंजलि, जो पीछे की सीट पर थी, उसे गंभीर चोटें आईं, लेकिन उसकी चेतना बची हुई थी। वह रेंगते हुए टूटी हुई खिड़की से बाहर निकली और सड़क पर गिर गई।
तहकीकात — इंस्पेक्टर विजय की एंट्रीअगली सुबह, केस इंस्पेक्टर विजय के पास आया। पहली नज़र में यह एक आम रोड एक्सीडेंट लग रहा था। लेकिन जब विजय ने फॉरेंसिक रिपोर्ट और दुर्घटना स्थल (Collision Site) की जाँच की, तो उन्हें कुछ गड़बड़ लगी।

रहस्यमयी सबूत: एसयूवी के अंदर से कोई आईडी कार्ड या गाड़ी के असली कागज़ात नहीं मिले। नंबर प्लेट भी फर्जी थी।
क्लोरोफॉर्म की बोतल: पिछली सीट से क्लोरोफॉर्म की एक बोतल मिली, जिससे साफ था कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि एक किडनैपिंग की कोशिश थी।
विजय अस्पताल पहुँचे जहाँ अंजलि आईसीयू (ICU) में भर्ती थी। होश में आते ही अंजलि ने जो बताया, उसने पुलिस के होश उड़ा दिए। उसने कहा, “सर, वो मुझे मारना नहीं चाहते थे। वो बार-बार किसी ‘पेनड्राइव’ के बारे में पूछ रहे थे।”

अपराध के पीछे का असली चेहराअंजलि एक बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी में डेटा एनालिस्ट थी। दो दिन पहले ही उसे अपनी कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम में एक ऐसी फाइल मिली थी, जिससे पता चलता था कि कंपनी नकली और जानलेवा दवाइयाँ बाज़ार में सप्लाई कर रही है। अंजलि ने वह सारा डेटा एक सीक्रेट पेनड्राइव में कॉपी कर लिया था।
कंपनी के मालिक, राजेश्वर सिंघानिया को जब यह पता चला, तो उसने अंजलि को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने और उस पेनड्राइव को हासिल करने के लिए अपने गुंडे भेजे थे। उसने गुंडों को सख्त हिदायत दी थी कि काम पूरी तरह गुप्त होना चाहिए।
लेकिन अंजलि की बहादुरी और उस अप्रत्याशित कार टक्कर (Force Collision) ने सिंघानिया के पूरे प्लान पर पानी फेर दिया।
न्याय और अंजामअंजलि ने अस्पताल के बेड से ही विजय को उस पेनड्राइव की लोकेशन बताई, जो उसने अपने घर के गार्डेन में छिपाकर रखी थी। विजय ने तुरंत अपनी टीम भेजकर पेनड्राइव बरामद की। उसमें मौजूद सबूत सिंघानिया को सलाखों के पीछे भेजने के लिए काफी थे।

शाम होते-होते, पुलिस ने राजेश्वर सिंघानिया को उसके आलीशान दफ्तर से गिरफ्तार कर लिया। अस्पताल में ठीक हो रहे उन दोनों किडनैअंजलि को उसकी सूझबूझ और अदम्य साहस के लिए राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। वह भयानक हादसा अंजलि के शरीर पर कुछ निशान तो छोड़ गया, लेकिन उसने एक बड़े क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश कर हज़ारों मासूमों की जान बचा ली।पर्स पर भी सख्त धाराएं लगाई गईं।
अंजलि को उसकी सूझबूझ और अदम्य साहस के लिए राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। वह भयानक हादसा अंजलि के शरीर पर कुछ निशान तो छोड़ गया, लेकिन उसने एक बड़े क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश कर हज़ारों मासूमों की जान बचा ली।
