रवि अपनी माँ से बहुत प्यार करता था, लेकिन नौकरी की भागदौड़ में वह हमेशा व्यस्त रहता। उसकी माँ रोज़ फोन करती, लेकिन रवि अक्सर कह देता—

माँ, अभी काम में हूँ… बाद में बात करता हूँ।”

एक दिन उसकी माँ ने कहा,“बेटा, कब घर आओगे? बहुत मन करता है तुम्हें देखने का…

रवि ने हँसते हुए जवाब दिया,“जल्दी आऊँगा माँ।”

लेकिन वह “जल्दी” कभी नहीं आया।

कुछ दिनों बाद रात में रवि के फोन पर गाँव से कॉल आया। किसी ने रोते हुए कहा—

बेटा… तुम्हारी माँ अब नहीं रही…”

यह सुनते ही रवि के हाथ काँपने लगे। वह तुरंत गाँव पहुँचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

माँ के कमरे में उसकी पुरानी चश्मा, दवाइयाँ और एक छोटा सा खत रखा था। काँपते हाथों से रवि ने खत खोला।उसमें लिखा था—

बेटा, मुझे पता है तुम बहुत व्यस्त हो।बस अपना ख्याल रखना।जब भी समय मिले, घर आ जाना…तुम्हारी माँ हमेशा तुम्हारा इंतज़ार करेगी

खत पढ़ते ही रवि ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा।क्योंकि अब घर में उसका इंतज़ार करने वाला कोई नहीं बचा था

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